शनिवार, 16 अगस्त 2008

ओलंपिक के धोखे: भाग २



ओलंपिक के उद्घाटन समारोह ही में हुई आतिशबाजी भी नकली थी। बिल्कुल उसी तरह जब फिल्मों में नकली बम विस्फोट किए जाते हैं। या नकली बारिश की जाती है। या फिर नकली खून बहता है। फिल्मों में हो सकता है तो ओलंपिक में क्यों नहीं हो सकता? दोनों का उद्देश्य तो एक ही है न, मनोरंजन! फिर भी यदि दिल नहीं मानता है तो चीन से कहें कि वो ओलंपिक में असली धमाके करवाता, जैसे कि हमारे शहरों में आजकल हो रहे हैं। तब मानें कि असली आतिशबाजी हुयी है!

ओलंपिक के धोखे: भाग १ | भाग २ | भाग ३ | भाग४

6 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

यह तो बहुत सुंदर धोखा था,जी।

nadeem ने कहा…

Anilji bilkul apne sahi pakda waise ye dhokha isliye kiya gaya jisse aatishbaazi bhi ho jaye aur pradushan bhi na ho.aur iseke liye kaafi anusandhan kiya gaya tha.... :)

Neetesh ने कहा…

हा हा..... :) यह तो बिल्कुल सही कहा आपने.........अब क्या है न, की असली आतिशबाजी देखने, सहने, और उसपर कोई प्रतिक्रिया न करने का जिगरा बस हम हिन्दुस्तानियों में ही बचा रह गया है.........तभी तो आए दिन बम धमाको को ऐसे लेते है, जैसे कुछ हुआ ही न हो....

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई हम तो जोर ऎसी आतिशबाजी धमाके के रुप मे देखते हे, इस लिये हमे तो यह साला चीन उल्लु ना बानाये,हमारे यहां तो हर शहर मे होते हे ओर वो भी असली जी

mahashakti ने कहा…

चीनी आईटम दिखावटी ही होते है :)

रंजन ने कहा…

ye to achchaa huaa.. aathishbaji ho gaye or pollution nahi hua...