रविवार, 27 जुलाई 2008

राम और अर्जुन ने अन्याय का सामना कैसे किया?


कई हज़ार साल पहले की बात है। अयोध्या-नरेश राम को राजनीति के चलते देशनिकाला दे दिया गया और वे जंगल में आ पहुंचे। उनकी सुंदर पत्नी सीता को रावण लूट ले गया। राम ने महासमुन्दर पार करके उस दुष्ट का पीछा किया और उसका संहार किया।

फिर ऐसा ही अन्याय दोबारा हुआ। पांडवों को राजनीति के चलते देशनिकाला दे दिया गया, और उन्हें मारने की चेष्टा की गई। कई अन्याय हुए। पांडवों ने युद्ध लड़ा, और अन्यायियों को मौत के घाट उतारा।

आज फिर ऐसा हो रहा है। आतंकी हमारे सर पर चढ़ कर हमें ही मौत के घाट उतार रहे हैं, वो भी पहले ख़बर दे कर, जैसे कह रहे हों, "देख मूरख, तुझे वहाँ मारूंगा। कर ले जो कुछ कर सकता है"। लेकिन इस बार कहानी कुछ "डिफरेंट" है। इस बार हम अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने की बजाय उसे शिरोधार्य किए हुए हैं। आतंकियों के गढ़ पर हमला करने की बजाय हम वहाँ तक सद्भावना की रेलगाडी दौड़ा कर दुनिया से अपनी कायरता के लिए वाहवाहियां लूट रहे हैं।

आज हमें उन्हीं राम और अर्जुन की ज़रूरत है जो अन्याय के ख़िलाफ़ न सिर्फ़ आवाज़ उठाते थे, बल्कि अन्यायियों को कुचलते भी थे। बहुत हो गई कायरता, अब गांडीव उठाकर इन अन्यायियों का हरण करना होगा।

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बिल्कुल सही कह रहे हैं. जागरुक आलेख.

Sanjay ने कहा…

अनिल जी,
अापके इस कथन को ("उनकी सुंदर पत्नी सीता को रावण लूट ले गया।")edit करना चाहुगा "लूट ले गया।" शबद की जगह धोखे से अपहरण कर ले गया उचित होगा।
आतंकवाद व आतंकियों के बारे मे अापने सच कहा, पर
हमे पहले देश मे छुपे कायर आतंकियों को जो जनता का पैसा उपयोग कर उनहे ही लूट रहे है खातमा करना होगा,
अाज हमें हर भारतीय मे राम और अजर्जुन को जगाने की ज़रूरत है जो अन्याय के ख़िलाफ़ हर कदम पर लड सके।
सञजय