रविवार, 20 जुलाई 2008

एक अकेला चना जिसने भाड़ फोड़ा - १


देश के चार बीमारू राज्यों में से एक है उत्तर प्रदेश। सदियों से पिछड़ा हुआ, और शायद कुछ और सदियों तक पिछड़ा ही रहेगा। लेकिन आज मैं आपको इस पिछड़े राज्य से एक बहुत ही उन्नत गाँव की बात बतलाऊंगा। गाँव का नाम है मूरखा। नाम तो जैसे बदनाम है, लेकिन शत प्रतिशत घरों में स्नातक हैं। ३५ घरों में से कुल ४५ लोग अमेरिका जाकर उच्च पदों पर विराजमान हैं।

लेकिन यह सब सम्भव कैसे हुआ? बहुत लम्बी दास्ताँ है, लेकिन आपके सामने कुछ ही शब्दों में निचोड़ूंगा:

गाँव में स्थितियां बहुत प्रतिकूल थीं, विकास का नामोनिशान नहीं था। करीब ३० साल पहले अमेरिका से पी॰ एच॰ डी॰ की उपाधि लेकर डॉक्टर अवधराज सिंह वापस अपने पिछड़े गाँव मूरखा में पधारे। पशु-चिकित्सक डॉक्टर अवधराज सिंह ने गाँव को प्रगति का मार्ग दिखने की चुनौती स्वीकार की। गाँव की बंजर भूमि में एक स्कूल खोला गया। डॉक्टर सिंह ने अच्छे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की। बच्चे और बच्चियां पढ़ते रहे, आगे बढ़ते रहे। देखते ही देखते स्कूल एक कॉलेज बन गया। कुछ बच्चे अमेरिका पहुँच गए, लेकिन अपने गाँव को नहीं भूले। वहाँ से भी संपर्क बनाये रखा, और लगातार पैसा और नया ज्ञान भेजते रहे मूरखा में। मूरखा में पढ़े हुए बच्चे आज सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी शिक्षा के बल-बूते पर धाक जमाये हुए हैं।

और थोड़ा आगे भी सुनिए।

इतना आगे बढ़ने के बावजूद मूरखा के लोग अपनी संस्कृति और परम्पराओं का ध्यान रखते हैं। विदेश गए हुए लोग भी वापस अपने गाँव मूरखा में आकर शादी-ब्याह और बच्चों के मुंडन जैसे संस्कार निभाते हैं। नौजवान और नवयुवतियां विदेशियों से नहीं बल्कि वापस आकर परंपरागत विधिपूर्वक मूरखा में ही शादी करते हैं।

मूरखा जैसा छोटा सा गाँव आज चीख-चीखकर पूरे भारत को कह रहा है "अपने बच्चों और बच्चियों को अच्छी शिक्षा दो। इसी में सबका भला है"

आओ आज बदल दें उस पुरानी कहावत को: अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है

सूत्र
और देखें

एक अकेला चना जिसने भाड़ फोड़ा: भाग १ | भाग २| भाग ३| भाग 4

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बड़ा अच्छा लगा पढ़ कर.

महामंत्री-तस्लीम ने कहा…

इस बहादुर चने से हम सबका परिचय कराने केलिए शुक्रिया। आशा है इससे दूसरे लोग भी प्रेरणा हासिल करेंगे।

राज भाटिय़ा ने कहा…

यह हुयी ना बात , बहुत अच्छा लगा पढ कर, ओर हमे मान हे ऎसे लोगो पर, धन्यवाद

Dr. Munish Raizada ने कहा…

मूरखा ग्राम की कहानी तो अति प्रेरणादायक है. एक NRI: एक ग्राम वाली नीति सफल हो सकती है. लेकिन भारत में भी वयस्था थोडी सुधरे तो वहीँ पी एच डी बनने लगें.