रविवार, 31 अगस्त 2008

मैं नहीं खरीदूंगा आईफोन



पिछले कुछ दिनों में ख़बर पढ़ी कि भारत में आईफोन बिकना शुरू हो गया है, और पहला खरीदार एक कॉलेज छात्र हैं। और इतना ही नहीं, आईफोन खरीदने वालों की भीड़ लगी हुई है - हर कोई हथियाना चाहता है इस करामाती खिलौने को। मैं भी जवान हूँ, मुझे भी टेक्नोलॉजी की वस्तुओं में रूचि है, और इसलिए मैं भी आईफोन खरीदना चाहता था।

लेकिन अब नहीं।

एक तरफ़ तो हम बढती महंगाई, मुद्रा स्फीति और आर्थिक मंदी की बातें कर रहे हैं। और दूसरी और अपनी (या अपने माँ-बाप की) गाढ़ी कमाई का पैसा स्टीव जोब्स की कंपनी द्वारा चीन में बनाये गए खिलौने पर बहाए जा रहे हैं। हम नौजवान बावलों ने जितना भी पैसा आईफोन पर खर्च किया है, वह सारा १) अमेरिका में एप्पल कंप्यूटर कंपनी को, और २) चीन में आईफोन की फैक्ट्री में जा रहा है। भारत को मिलेगा ठेंगा। सीधा-सीधा हिसाब है, कॉलेज के छात्र तो क्या, दूसरी कक्षा का बच्चा भी समझ सकता है।

सुसंस्कृत देश के आदर्श निवासियों, ज़रा सोचो! ३१००० रूपये का ये खिलौना खरीदने की बजाय यदि कोई आम मोबाइल खरीदोगे, तो भी इतना पैसा बच जाएगा कि किसी गरीब परिवार को दान करके उनका २ महीने का खर्चा चल जाएगा। किसी अनाथाश्रम में किसी बदकिस्मत बच्चे की ज़िन्दगी में कुछ खुशियाँ आ सकेंगी। अपनी माँ और बहन को एक अच्छी साड़ी, और अपने पिताजी को एक सुंदर कमीज़ दे सकोगे। अपने छोटे भाई के लिए एक नया कंप्यूटर खरीद सकोगे ताकि वह भी अपनी पढ़ाई अच्छे तरीके से कर सके। बिहार में बाढ़-पीड़ितों के लिए चार दर्ज़न कम्बल और कुछ दवाइयाँ आ जाएँगी।

प्राथमिकताएं,
प्रथम न रहीं,
द्वितीयिक्तायें हो गयीं।

- - - -

5 टिप्‍पणियां:

सुमीत झा ने कहा…

अनिल जी जिस दिन यह ज्ञान हम में आ जाएगा, उस दिन हम भी अमेरिका के साथ खरे होने की हालत में आ जायेंगे.



http://journalistsumit.blogspot.com

Anil Pusadkar ने कहा…

sahi kaha anil jee

Neetesh ने कहा…

हा हा......देखिये माना की इस खिलौने के लिए ३१००० Rs खर्च करना सच में मुर्खता है.........जहाँ अमेरिका में यह खिलौना २००$ मिल रहा है, वहीँ भारतीय इसकी कहीं ज़्यादा कीमत चुका रहे है........
पर अगर कोई नौजवान इसमे खर्च भी कर रहा है, तो उसमे कहाँ तक क्या कहा जा सकता है? मेरा मतलब है की इस फ़ोन को लेने वाले ९०% से ज़्यादा लोग नौजवान ही होंगे, और नई चीजों को परखना और उन्माद का नाम ही जवानी है.........हा हा हा........सरल मन से कह रहा हूँ, की किसी संपन्न नौजवान को i-phone से दूर रहने की सलाह कुछ वैसे ही हो गई, जैसे की एक पिता अपने नवजवान पुत्र को fashion से दूर रहने के लिए देता है ( हलाकि पिता भूल जाते है, की अपने collage की दिनों में उनके भी मन में वही तरंगे उठा करती थी हा हा हा).........देखिये मैं, आप और हर कोई जो उम्र के इस पड़ाव में होता है, वह कुछ ऐसी ही सोच रखता है.........किसी में कुछ कम होती है, किसी में थोडी ज़्यादा....पर अपने दिनों में सभी एक जैसे ही होते है.
रही बात चीन में बन ने की , तो देसी बने cellphone तो शायद ही कोई मिले........और इमानदारी की बात यह है की किसी ऐसे कम उम्र के नौजवान से अपने cellphone के पैसे को बाढ़ पीडितो को दान में देने की अपेक्षा रखना कुछ वैसी ही बात हो गई, जैसे की सोमालिया के भूखे से अपनी रोटी बाटने की अपेक्षा रखना....यह थोड़ा ज़्यादा हो गया.......मेरा मतलब है, भले ही मुझे नराधम कहें, पर सच बात यह है की अपने युवा अवस्था में मैंने भी कभी अपने पसंदिता खिलौने का बलिदान दे कर, किसी बाढ़ पीड़ित को पूरा पैसा दान में नही दिया.......५० - १०० रुपयों की बात अलग है.
व्यक्तिगत तौर पर इतनी कीमत पे अब यह phone मै नही खरीदूंगा, मेरे विचार से इसकी कीमत इसके features से कहीं ज़्यादा है, और इतने पैसे इस phone पे निवेश करना सही नही है......शायद इसे ही उम्र का अनुभव कहते है. :)

Aaryan Gautam ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr. Anil Sharma ने कहा…

Dear Anil ji, you are right about iphone.But there is no indian or multinational company which is manufacturing such quality phones and other electronic items. I think almost all laptops, desktop and phones are made in china, korea or other countries but not made in India. In this condition what should we do..............buy outdated and.............or made in china