मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

फूल बने या फ़ूल?


बरसों से पढ़ता आया हूँ कि जो राष्ट्र अपनी भाषा में कामकाज करते हैं वहीं तरक्की होती है। बचपन से ही मैं हिंदी का घोर समर्थक हूँ। कल पुस्तकालय में बैठकर एक चिट्ठा टाइप कर रहा था, तो एक मित्र वहाँ से गुजरे। मेरे लैपटॉप की तरफ देखकर हैरान हुये, और पूछा, "हिंदी में कैसे लिखा?" मैंने उन्हें बिठाकर आधे घंटे का मुफ्त तकनीकी लेक्चर पिलाया। उन्होंने किसी तरह मुझसे जान छुड़ाई, और वहाँ से भाग खड़े हुये।

उनके जाने के बाद जब मैं अत्यानंदित मुद्रा में हिंदी के चिट्ठे पढ़ रहा था, तो ध्यान दिया कि बहुत से चिट्ठों में व्याकरण और वर्तनी (spelling) की गलतियाँ हैं। मैंने अपने ही कुछ पुराने लेख पढ़े तो उनमें ऐसी गलतियाँ पायीं, और उन्हें ठीक किया। आमतौर पर हिंदी चिट्ठों पर होने वाली कुछ गलतियों के उदाहरण पेश हैं:

उसे भूक लगी है। (भूख)
वह मुझसे बहुत बडी है। (बड़ी)
वह मुझपर हंस रहा था (हंस एक पक्षी है, हँसना एक क्रिया है)
ग्यान होना चाहिये (ज्ञान)
खाद्यशृंखला में मानव सबसे ऊपर है। (खाद्यश्रृंखला)
यह है. वह नहीं है. (अंग्रेजी का पूर्णविराम)
मैंने उसे अप्रैल फूल बना दिया (फ़ूल - नुक्ता देखें)
सूचना आयी की काम हो गया (कि)
मैं पहली कच्छा में पढ़ता हूँ (कक्षा)
लंडन वाली मामी आयीं (शहर का हिंदी में नाम "लंदन" है)
डाक्टर आया था (डॉक्टर)
क्वैश्चन की लैंग्विज को समझें (प्रश्न की भाषा को समझें)

इन गलतियों के कुछ तकनीकी कारण भी रहे होंगे। या फिर हो सकता है व्यस्तता के कारण ऐसा हुआ। थोड़ा बहुत अज्ञान भी हो सकता है। परंतु आखिरी उदाहरण में अंग्रेजी के शब्दों को सीधा ही उठाकर चिपका दिया गया है, जिसका औचित्य मेरी समझ के बाहर है।

जब अंग्रेजी में कोई वर्तनी या व्याकरण की गलती होती है, तो गलती करने वाले को हम सूली पर चढ़ा देते हैं। लोगों को यहाँ तक कहते सुना है कि फलाने "वर्ड" की "स्पेलिंग" नहीं जानते हो, किस स्कूल में पढ़े हो? लेकिन हिंदी चिट्ठों में आजकल इस तरह की गलतियों को तुच्छ समझकर माफ़ कर दिया जाता है। शायद शराफ़त है, या फिर हिंदीप्रेम इतना प्रगाढ़ है कि गलती को माफ़ करके हिंदीलेखन को प्रोत्साहन दिया रहा है।

खैर जो भी हो, किसी भी तरह की हिंदी लिखें, अाने वाले कुछ सालों तक तो सब माफ़ है। एक दिन जब हम हिंदुस्तानी अपनी संस्कृति को समझ पायेंगे, तब हिंदी के ही गुण गायेंगे!

आइये साफ़-सुथरी हिंदी लिखने का प्रण करें!

जय हिंदी, जय हिंद!

12 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

मैं अधिक गलतियां तो नहीं करती ... पर चंद्रविंदू और ड या ढ के नीख्‍े विंदी लगाने में समस्‍या होती है तो उसे यूं ही छोड दिया करती हूं।

अनिल कान्त : ने कहा…

कभी कभी सोफ्टवेयर कि वजह से कुछ गलतियाँ छोड़नी पड़ती हैं या कभी कभी जल्दबाजी में गलती रह जाती है

अवाम ने कहा…

मुझे लगता है कि जो भी गलतियाँ ब्लॉग लिखने के दौरान होती हैं, वो इसलिए क्योंकि अभी ब्लॉग उतना यूसर फ्रेंडली नहीं हुआ है. बहुत सारी गलतियाँ इसी कारण से हो जाती हैं. काफी सारे शब्द ठीक से ट्रांसलिटरेट नहीं हो पाते है. जिसके कारण से चूक हो जाती है. ब्लॉग में अभी बहुत सारा कम होना बाकी है.

परमजीत बाली ने कहा…

मैं कोशिश तो बहुत करता हूँ कि गलतीयां ना करूँ लेकिन मुझ से अक्सर मात्राओं और बिन्दी की गलतीयां ज्यादा होती हैं।सुधार करने की कोशिश जारी है।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

ये क्लास अच्छी लगी। कभी हमारी गलती दिखे तो जरूर बताइगा। कान पकड़ उठक बैठक लगाएँगे।

विश्वनाथ सैनी... ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
neetesh ने कहा…

मै google indic transliterate के द्वारा हिंदी टाइप करता हूँ. यह मुझे सबसे आसान लगता है, क्युकी इसमें हिंदी को रोमन लिपि में वैसा का वैसा लिख दो, और वह उसे हिंदी में बदल देता है.....परन्तु इसमें काफी त्रुटियां भी रह जाती है क्युकी यह सॉफ्टवेर अभी भी काफी अपरिपक्व है.
मेरे Linux OS में हिंदी टंकित करने के विकल्प है, पर वह विकल्प थोड़े जटिल है.

रेनहार्ड ने कहा…

बिन्दी लगाने में अक्सर गलती हो जाती है क्योंकि कई बार लिखते समय बिन्दी नज़र नहीं आती है ।

''ANYONAASTI '' {अन्योनास्ति} ने कहा…

यार कभी-कभी आप जैसे लोग भावुक कर देते हो,फिर भी 'हिन्दीयाने' के जज़्बे लिए सलाम| "विविधा:मंथन " [|अन्योनास्ति|

Sucheta ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रयास है यह अनिल जी आपका.
बधाई एवं धन्यवाद्.

मेरी कोशिश यह रहती है की कम-से-कम मैं हिंदी के शब्द हिंदी में और अंग्रेजी के शब्द अंग्रेजी में लिखूं. युवा पीढ़ी को भी यह सुझाव देती हूँ.
इससे हिंदी हमेशा लिखने में रहेगी.

Anil Madheshiya ने कहा…

मै एक हिंदीप्रिय व्यक्ति हू! और मुझे हिंदी बहुत अच्छी लगती है,
कृपया आप इस प्रयास जो जारी रखें!
अनिल मध्देशिया

Anil Madheshiya ने कहा…

मै एक हिंदीप्रिय व्यक्ति हू! और मुझे हिंदी बहुत अच्छी लगती है,
कृपया आप इस प्रयास जो जारी रखें!
अनिल मध्देशिया